छाल। क्षेत्र में आयोजित की जा रही जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों में असंतोष और नाराजगी का माहौल देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर होने वाली जनसुनवाई में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अपेक्षित सक्रिय भागीदारी नजर नहीं आ रही है।
ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दे छाल क्षेत्र के बाहर पुरुंगा, तमनार और धरमजयगढ़ जैसे इलाकों में सामने आते हैं, तब जनप्रतिनिधि इन मुद्दों को लेकर मुखर नजर आते हैं और विरोध-प्रदर्शनों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। वहीं, अपने ही क्षेत्र में आयोजित जनसुनवाई को लेकर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों की समस्याओं, आशंकाओं और आपत्तियों को शासन-प्रशासन के समक्ष रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा रहती है कि वे अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को गंभीरता से उठाएं और जनहित से जुड़े मामलों में अपनी भूमिका एवं जवाबदेही स्पष्ट करें।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में होने वाली जनसुनवाई से जुड़े मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों की स्पष्ट और सक्रिय भूमिका सामने आना जरूरी है, ताकि प्रभावित लोगों की आवाज उचित मंच तक पहुंच सके।
अब सवाल यह है कि छाल क्षेत्र की जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों के बीच उभर रहे असंतोष पर स्थानीय जनप्रतिनिधि क्या रुख अपनाते हैं और अपनी भूमिका को लेकर किस प्रकार स्पष्टीकरण देते हैं।
